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Wednesday, June 13, 2012

Other Hindi Comics and Me


आप लोगो का फिर से स्वागत है मेरी इस चौथी पोस्ट मे। मैने अपनी पिछली पोस्ट मे कहा था कि आगे मैं बात करुंगा late 1995 से लेकर 2000 तक के अपने कामिक्स सफर की। लेकिन मैं थोडी जल्दबाजी कर गया। Indian Comics or Hindi Comics से जुडे मेरे कुछ अनुभव मैं शेयर करना भूल गया था। मैने आप लोगो को ये तो बता दिया था कि मैने manoj comics भी उसी समय से पढ़ना शुरु कर दिया था लेकिन बाकी publications की comics भी मैंने तभी शुरु कर दी थी।
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उस समय comic मेरे लिए मनोरंजन का सबसे अच्छा साधन थी। और मेरे को जो कोई भी comic मिलती थी मैं पढ लेता था। मेरे दोस्तो को भी comic पसंद आने लगी थी। ऐसे ही एक बार मेरे एक दोस्त के दोस्त ने कुछ परम्परा comics खरीदी। वो मेरे जीवन की पहली परम्परा comic थी। उन मे से मुझे अब सिर्फ Gold Medal (अंग्रेजीलाल-हिंदीलाल) का ही नाम याद है। और ये comic अभी भी मेरे पास है।

एक बार मेरे पापा पटरी बाजार से कुछ comics लेकर आए थे। उन मे फोर्ट और नूतन के अलावा और भी प्रकाशक थे लेकिन राज और manoj नही थी। उस समय पहली और आखिरी बार मेघदूत को पढा। आगे चलकर फोर्ट, नूतन और परम्परा मे से किसी भी कम्पनी की कोई भी comic दोबारा नही मिल पाई।

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कुछ समय बाद तुलसी comic के भी दर्शन हो गए और मुझे इसके तीनो ही leading superheroes अंगारा, जम्बू और तौसी पसंद आए। जम्बू की जम्बू और शनिश्चर मैंने उसी समय पढ ली थी। इसमे अंडा देवता मुझे हमेशा याद रहा। 

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राधा comics के दो ही किरदारो की comics उस समय देखने को मिली। बौना जासूस और जूडो क्वीन राधा। बौना जासूस और सवा करोड की भैंस मेरी पहली बौना जासूस की comic थी। इसे पढ कर बहुत हंसी आई थी।

Hindi Comics, Diamond Comics
hindi comics, diamond comicsIndian Comics की बात चल रही हो और Diamond Comics का जिक्र ना हो ऐसा कैसे हो सकता है भला। Diamond Comics ही शायद भारत की ऐसी एकमात्र comic कम्पनी है जिस पर Parents भी एतराज नही करते। चाचा चौधरी, रमन, पिंकी, श्रीमती जी, आदि सभी लोकप्रिय पात्र मैंने बचपन मे ही पढे। उस समय अग्निपुत्र-अभय Diamond Comics के मेरे Favorite Action Hero थे। मैंने उनकी कुछ comics तब पढी थी। अभय की Bike तो गजब की थी। मैं और मेरा दोस्त अक्सर उसकी बाईक के बारे मे बाते करते रहते थे।
Diamond की ही किसी comic मे हिडकचल्लू नाम का एक किरदार था। comic का नाम याद नही लेकिन ये नाम मुझे बहुत ही funny लगा था। काफी समय बाद (शायद 1998 के आसपास) मैने अपनी चाची के घर एक comic पढी थी। इसमे मोटू-पतलू और घसीटा राम की एकदम फाडू कामेडी थी। हंस-हंस कर बुरा हाल हो गया था। मैं जब भी चाची के घर जाता था ये comic जरुर पढता था।

manoj comics, hindi comics, indian comicsदुर्भाग्य से आगे चलकर Diamond Comics के अलावा इन मे से किसी भी publication की comic पढने को नही मिली। ये comics पुरानी ही मिला करती थी। मतलब नया सेट नही मिलता था। जब्कि राज comics नया सेट निकालती थी और वो आसानी से मिल भी जाता था। राधा और तुलसी तो मैने अपने दोस्तो से माँग कर ही पढी थी। फिर मेरा भी रुझान Raj Comics मे ज्यादा बढ गया और मैंने भी इन कामिक्सो पर ज्यादा ध्यान नही दिया।


manoj comics, hindi comicsहाँ Manoj Comics इस बीच मिलती रही। हालाकि उनकी नई comics भी कम ही मिला करती थी लेकिन पुरानी comics अक्सर मिल जाती थी। त्रिकाल देव, तूफान, इन्द्र, विध्वंस, क्रुकबांड, हवलदार बहादुर और राम-रहीम आसानी से मिल जाते थे। मेरा भाई तो हवलदार बहादुर का फैन बन गया था उस समय। उस समय मुझे तूफान और विध्वंस बहुत पसंद थे और मुझे इनकी जो भी comic मिलती थी मैं पढ लेता था। बाद मे कौआ, मनु और कान भी मिलने लगे। बाद मे कुछ बुक डिपो वाले manoj के नए सैट भी लाने लगे थे। लेकिन उस समय सागर-सलीम, कर्नल कर्ण, सुपर थीफ रुस्तम का नाम भी नही सुना था। जब से comics कलैक्ट करनी शुरु की है तब से इन सबका नाम पता चला।

comic किराए पर पढने के अलावा मैं अब comics बदल कर भी पढने लगा था। ये बात 1995 के आखिरी दिनो की है। अब मेरे पास दो चार comics हो गई थी और मैं अपने दोस्तो से बदल-बदल कर comics पढता था। ज्यादातर हम लोग सिर्फ पढने के लिए ही बदलते थे। मतलब कि पढ कर वापस कर दी। कोई comic अच्छी लगती थी तो हमेशा के लिए भी बदल लेते थे। बचपन मे ज्यादातर लोगो ने ऐसा ही किया होगा। ऐसे ही एक बार मैंने अपने रिंकू नाम के एक दोस्त से कुछ comics पढने के लिए ली। वो मुझे ऐसे ही comics दे देता था। मैंने "खूनी खिलौने" पहली बार उसी से लेकर पढी थी। तकरीबन 15 से 20 तक comics थी और ज्यादातर Manoj Comics. फिर काफी समय तक मैं उस से मिल नही पाया। लेकिन मैंने उसकी ये comics डेढ से दो साल तक संभाल कर रखी और जब बाद मे वो मिला तो वापिस कर दी।

इस पोस्ट मे तो सिर्फ other Indian Comics publication के साथ मेरे शुरुआती अनुभव के बारे मे ही बात हो पाई। अब late 1995 से लेकर 2000 तक के दौर के बारे मे बात करेंगे अगली पोस्ट मे। उस पोस्ट मे Raj Comics पूरी तरह से केन्द्र बिंदु (center of the focus) बनी रहेगी। आप लोगो के comments का इंतजार रहेगा।

9 comments:

  1. Uska bi intzar rahega.waise ye anubhav bi dilchasp tha kash pahle ki tarah vapas aa jaye ye comix companies

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  2. आपके अनुभव पढ़ कर अच्छा लगा संजय.
    मेरी राय में Diamond कॉमिक्स नहीं बल्कि "अमर चित्र कथा " वो कॉमिक्स प्रकाशन था जिस पर parents ने कभी ऐतराज़ नहीं किया. Diamond कॉमिक्स में James Bond series भी publish होती थी, जो parents कभी नहीं चाहेंगे कि बच्चे पढ़ें.

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    1. Parents allowed kids to read chacha chaudhary, pinki and other kids comics. Can't say anything about Amar Chitra Katha. They are not actually comics. They are tales based on our culture and History. I consider comic as a fantasy stuff. But Amar Chitra Katha is excellent on what it stands for. No hard feeling.

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  3. पहली 3 पोस्ट की तरह यह भी लाजवाब पोस्ट है
    यह जानकार अच्छा लगा कि थोड़ी थोड़ी ही सही लेकिन आपका जुड़ाव काफी सारी इंडियन companies की कॉमिक्स से बना रहा था..
    फोर्ट कॉमिक्स delhi में नहीं मिल पायी आपको...यह जानकार आश्चर्य हुआ..हमें लगता था कि delhi में हर कॉमिक्स मिल जाती है.
    अदला-बदली करके कॉमिक्स तो हर fan ने पढ़ी होगी अपने बचपन में...उस चीज़ का एहसास अलग ही होता था

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    1. I read fort comics only once. Counter it many times but never got any chance to read them.

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  4. Wah Sanjay kaam kiya hai bhai..sach mein comics jaisa entertainer koi nahi..bachpan ki sachchi saathi..SCD pe bhi likho..

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    1. Read previous posts of my blog. Thanks for reading.

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  5. Tulsi comics main bhi jumbo size comics hoti thi, mujhe aaj bhi yaad hain meri pehli tulsi comic, jambu aur sarkanda. Haalanki Manoj comics horror ke liye zyaada mashoor thi, jaise ruhon ka devta, chaar sir shaitan ke, dracula series etc.

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    1. हारर कामिक्से मुझे ज्यादा अच्छी नही लगती चाहे वो कोई भी publication हो। सिर्फ कुछ-एक राज कामिक्स छोड कर। तुलसी के जम्बो साईज कामिक राज कामिक्स के सुपर विशेषांक से भी बडे हुए करते थे।

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