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Monday, June 4, 2012

Initial Phase of my Journey


अपनी पिछली पोस्ट मे मैने बताया था कि कामिक्सो से मेरा परिचय कैसे हुआ। इस पोस्ट मे बात करेंगे कामिक्सो के साथ मेरे सफर के शुरुआती दौर की।

Manoj Comics, Hindi Comics, Old Hindi Comicsजब मुझे कामिक्से अच्छी लगने लगी तो मैं उसी दुकान से कामिक्से किराये पर लेकर पढने लग गया। और कुछ ही समय मे मैंने वहाँ की सारी कामिक्से पढ डाली। उस दुकान पर ज्यादातर Raj Comics ही थी। कुछ एक ही Manoj Comics थी। वही मैने अपनी पहली Manoj Comics “तूफान की मौत भी पढी। ये कामिक्स मुझे बहुत पसंद आई और अभी भी मेरे पास है। उस दुकान पर सारी पुरानी कामिक्से ही थी। नई कामिक्से वो नही लाता था। ना ही मुझे नई कामिक्सो और नए सैट के बारे मे कुछ मालूम था



Raj Comics
जब उस दुकान पर पढने के लिए कोई कामिक नही बची तो मैंने अपने पापा से कामिक लाने के लिए कहा। और लोगो के parents की तरह मेरे पापा कामिक को बुरी चीज नही मानते थे। लेकिन वो काफी दिनो तक मुझे गोली ही देते रहे। कल ला दूँगा, भूल गया, स्टेशन पर थी नही, इत्यादि। लेकिन एक रोज मैंने बहुत जिद्द करी तो उन्होने मुझे दो कामिक्से ला कर दी । उनमे से एक थी बौना राक्षस 

और दूसरी थी… Guess it again Guys. 
दूसरी कामिक थी नागराज। मेरी पहली नागराज की कामिक शायद नागराज ही थी। इस बारे मे ठीक से याद नही है कि मैने पहले Nagraj aur Bem Bem Bigalow पढी या Nagraj. अगर बेम बेम बिगेलो मेरी पहली Nagraj की कामिक थी तो भी नागराज मेरी Nagraj की पहली खरीदी हुई कामिक थी।

अब मेरा कामिक पढने का शौक तेजी से परवान पर चढ रहा था। ये बात 1995 की है तब मैं 5th class मे चला गया था। मेरे प्राइमरी स्कूल के पास ही एक दुकान थी जो जो नए सैट लाता था लेकिन मुझे मालूम नही था कि कामिक्से सैट के हिसाब से आती है। उस के पास से मैने Super Commando Dhruva की सर्कस, हत्यारी राशिया पढी थी। उस समय तक भी विशेषांक का किराया 1रुपया ही था। इसके अलावा मैंने वहाँ से Bhokal की शुरुआत की कुछ कामिक्से भी पढी।

How Super Commando Dhruva became my Favorite:
Indian Comics, Raj Comics

एक बार मैंने कहा कि राज कामिक्स मे सबसे तगडा हीरो डोगा है। तो इस पर मेरे भाई ने कहा कि सबसे जबरदस्त हीरो है SuperCommando Dhruva. डोगा तो अपने पास इतने सारे हथियार रखता है लेकिन ध्रुव तो खाली हाथ रहता है। नागराज के पास भी नाग है लेकिन ध्रुव के पास कोई हथियार नही है फिर भी वो गुंडो को पीट देता है। इसलिए ध्रुव सबसे अच्छा है। मेरे भाई ने तो मेरी आँखें खोल दी। तभी से ध्रुव मेरा फेवरिट है। कभी-कभी हम दोस्त आपस मे ये बाते भी करते थे कि नागराज और ध्रुव की लडाई मे कौन जीतेगा। मेरा एक दोस्त कहता था कि नागराज ध्रुव के मुँह मे सांप डाल देगा और सांप उसके पेट की आंते खा जाएगा। मैं कहता कि ध्रुव फुर्ती से बच जाएगा और नागराज को पेल देगा। हा हा हा।

अब तक मेरे मोहल्ले मे और मेरे सभी दोस्तो को पता लग गया थी कि मैं comics का शौकीन हूँ। ऐसे ही एक बार एक बडे लडके ने मुझ से कहा कि तूने ध्रुव की वो comics पढी है जिसमे ध्रुव मर जाता है। मैं ये सुनकर एकदम से सदमे मे आ गया। मुझे लगा कि इसके बाद तो ध्रुव की कामिक्से ही नही आई होगी। मैने उस से कामिक का नाम पूछा तो उसने बताया मैंने मारा ध्रुव को। फिर तो इस कामिक की खोज बीन शुरु हो गई। काफी ढूंढने के बाद एक दुकान का पता चला जो मेरे घर से काफी दूर थी। रेलवे लाईन क्रास कर के। और वो इलाका गुंडो बदमाशो से भरा हुआ था। घरवाले उस तरफ कभी भी नही जाने देते थे। लेकिन मैं चला ही गया वहाँ कामिक की खातिर। वहाँ मैने मेरे मारा ध्रुव को के अलावा Nagraj की भी कुछ कामिक्से पढी। नागराज और कांजा, नागराज का अंत, शाकूरा का चक्रव्यूह्। मैने मारा ध्रुव को पढने के बाद थोडे समय बाद मैने हत्यारा कौन भी पढ डाली और जब सच्चाई का पता चला तो जान मे जान आई कि चलो अभी और कामिक्से भी पढने को मिलेगी।

ध्रुव की कुछ और कामिक्से भी थी जिनके लिए मैं काफी उत्साहित रहा। डाक्टर वायरस और वैम्पायर। डाक्टर वायरस का तो नाम ही काफी थी मुझे excited करने के लिए। और वैम्पायर के बारे मे मुझे एक लडके ने बताया था कि इसमे ध्रुव का मुकाबला बगैर खोपडी वाले इंसानो से होता है। वो तो कामिक पढ कर पता चला कि वो बगैर खोपडी नही बगैर दिमाग वाले आतंकवादी थे।
                                      
वैसे मैं आप लोगो को एक बहुत ही मजेदार बात बताता हूँ। शुरुआत मे मुझे ये लगता था कि ये नागराज, ध्रुव, बांकेलाल असली मे थे। पुराने समय मे। और अब Raj Comics वाले इनके ऊपर कामिक्से निकाल रहे है। ही ही ही।
Raj Comics, Dhruva Comics

पिछले पोस्ट के बारे मे एक दोस्त ने कहा था कि पोस्ट छोटी थी और जब मजा आने लगा तो वो खत्म हो गई। इस बार काफी बडी पोस्ट लिखी है उम्मीद है आप लोगो को पसंद आएगी। अगली पोस्ट मे बात करेंगे late 1995 से लेकर 2000 तक की। Raj Comics के सबसे सुनहारे दौर की। (मेरे और मेरे हमउम्र लोगो के लिए)। पोस्ट पर आपके comments का इंतजार रहेगा। इस ब्लाग को दूसरे सोशल नेटवर्क पर भी फैलाए। facebook, twitter and google+ पर शेयर करिए। 

18 comments:

  1. tumhara blog padhkar meri bhi purani yaadein taza ho gayi......''maine mara dhruv ko'' comics ka waqt yaad aa gaya......awesome blog. waiting for the next post.

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  2. mann kar raha hai ke teri saari comics chura lu.....

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    1. भाई अभी तो मैने यहाँ पर कामिक्से लगाई ही नही। :)

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  3. apne comics prema aur safar ke baare mein kahne ke liye humare paas jyaada kuch kabhi nahin raha...lekin aapki comics yaatra padhte huye..hum khud bhi usme kho jaate huye...apna bachpan yaad kar lete hain..
    bahut achcha likha hai.

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  4. bhai yeh post bhi itni achhi lagi ki chhoti pad gayi,padhte padhte kab mai hansne laga pata nahi chala....agli baar isse bhi 4 guna bade post ka intezaar rahega..great going

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    1. हंसने वाली कौन सी बात थी इस पोस्ट मे। :D

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    2. "Nagraj aur Dhruva sach me the" eh padhke hansi to ani hi thi...waise man hi man mai bhi bachpan me pahuch gaya tha...hum sach me bachhein hi the...masumiyat jo aaj ke bachhon me missing hai hum mein bharpur thi....

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    3. अब मासूमियत की जगह attitude ने ले ली है।

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  5. "...एक दोस्त कहता था कि नागराज ध्रुव के मुँह मे सांप डाल देगा और सांप उसके पेट की आंते खा जाएगा। मैं कहता कि ध्रुव फुर्ती से बच जाएगा और नागराज को पेल देगा।" he he...

    Wakai koi bada tab kitna bhi samjhaye comics ka wo jo janoon tha wo nahi hatta tha....

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    1. सही बात है मोहित भाई। तब वक्त ही कुछ और था।

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  6. पोस्ट पसंद करने के लिए सभी दोस्तो का धन्यवाद।
    Thank you friends.

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  7. bahut khoob sanjay (BAKELAL) bhai.......
    http://indiacomic.blogspot.in/

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  8. bahut khoob sanjay (BAKELAL) bhai.......
    http://indiacomic.blogspot.in

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  9. Woh din sach main alag the, comicson ke liye doston se ladna, jhagadna, kabhi kabhi to dost exchange kar ke waapas lautate bhi nahin the. sach main I feel ki present generation IPad aur Iphone se aage ki soch bhi nahin sakti. un dinon ki baat hi kuch alag thi, school main comics padte hue pakde jaana. Aapne kaha tha ki aap comics ke liye gunde mawaliiyon ke rehne waale jagah pe bhi gaye the, main toh accident karwate karwate bacha tha, kohram khareed kar main sadak cross kar rahan tha aur sadak pe dhyan hi nahin diya, pura dhyan cover page par hi tha :) :), kripya aur bhi experiences likhon bhai aap.

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    1. दोस्त उन अच्छे दिनो का सबको अनुभव कराने के लिए ही मैंने ये ब्लाग लिखा है। मैं समझ सकता हूँ कि मेरे हम उम्र के लोग उस समय को कितना miss करते है। आप तो सिर्फ कवर देख रहे थे, मैं तो राह पर चलते-चलते ही कामिक पढ लेता था। भाई सब्र ही नही होता था। अभी बहुत कुछ लिखना बाकी है। थोडा टाईम लगेगा। पढाई भी करनी होती है। क्या करे :)

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  10. bohot acha blog hain Sanjay, Keep it up.

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